आप पूजा करते हो पाठ करते हो भाई जरा मंदिरों में [संगीत] भगवान बनाते हो जयपुर से मूर्तियां लेकर ए जाते हो उसकी प्राण प्रतिष्ठा करते हो उसे पर मंत्र देते हो अरे उसे पत्थर को भगवान बनाने वाले भी तुम ही हो अरे तुम ही भगवान बना लेते हो तुम ही उसकी पूजा करने लगता हो तुम ही उसकी आराधना करने लगता हो मैं आपसे निवेदन करता हूं अरे मंदिर में तो वो भगवान है जिसे हम बनाते हैं वो घर में वो भगवान है जिसने हमें बनाया हुआ है वह मां-बाप हुआ करते हैं जो आज से पूजा और शुरू करना जिसने इस दुनिया में मुझे बनाया है वो भी किसी भगवान से कम एक बात याद रखना मंदिर का भगवान तो मांगने के बाद वरदान देता है पूजा के बाद वरदान देता है मंदिर का भगवान तो मांगने के बाद देता है लेकिन मां आप तो ऐसे भगवान है जो बिना मांगे बच्चे को सब कुछ दे दिया करते हैं वो जो कुछ भी करते हैं अपनी औलाद के लिए किया करते हैं अपने बच्चों के लिए किया करते हैं एक आप कामता है मेहनत करता है किसके लिए करता है पसीने में मां डूबती है पसीने में मां डूबती है पिता धूप में दबता है पसीने में मां डूबती है पिता धूप में तप्त है तब जाके किसी बच्चे से धूप में तप्त है पिता पसीना तब जाके कहानी बच्चे का पिता की भी भूमिका बहुत महान है मां आंखों में आंसू लेक अपने दर्द बता देती है पिता अपने दर्द साइन में छुपा के रखना है मा पालनपुर पोषण करती है तो पिता घर की व्यवस्था करता है जीवन की गाड़ी में से यदि एक भी पहिया निकाल जाए करते हैं मां हमेशा सच बोलती है फिर कभी कभी ऐसा लगता है की मां झूठ भी बोलती है मां से बड़ा झूठ कोई नहीं है और बच्चा कहता है मां तुम भी खाओ पहले बार मां झूठ बोलती है की बेटा झूठ मां बोला करती है एक बात याद रखना एक बार जिंदगी में केवल एक बार एक बार जीवन में ऐसा होता है की जब हम धरती पर आए थे जब जन्म होता है तो हम रोटी हैं और मां के चेहरे पर मुस्कुराहट आई है की मेरे बच्चे का जन्म हो गया है पहले बार ऐसा होता है एक बार बेटा रोटा है और मां हस्ती है उसके बाद जिंदगी में की नहीं आते बेटा रोटा है तो मां की आंखों में से आंसू बा जय करते हैं बेटे के रन पर मानसी हो ऐसा दोबारा जीवन में कभी नहीं होता है केवल जन्म के समय होता है लेकिन वो मां भूल जाति है की आज मेरा हंसना मेरे लिए जिंदगी भर के आंसू बन जाएगी मंदिरों में जाति है संतो के डर पे जाति है कितनी मेहनत से बच्चे को जन्म देती है कितने अरमानों से बच्चों को जन्म देती है एक मां दुख तो तब होता है जब बुढ़ापे में उसका बेटा उसकी उपेक्षाएं किया करता है ध्यान रखें मान्यवर एक बुध था बुढ़ापा दो तरह से आता है उम्र से उम्र ढलती है या उम्र से पहले आदमी बुध हो जाता है समय से पहले आदमी बुध हो जाता है उम्र से बुढ़ापा आए तो कोई बात नहीं है समय से पहले बुध पत्ता आता है औलाद बुढ़ापे में अपने से मुंह फ़िर लिया करती है अपने ही घर में जब पराई पान का दिशा होता है अपने ही घर में जब घुसते हुए हमें डर लगे लगता है अपने ही घर में खसते हुए जब डर लगे लगता है अपने ही घर में आवाज करते हुए हमें डर लगे लगता है घरों के यही हाल है मां-बाप ऐसे जी रहे हैं डर डर के जीते हैं अपने घर को अपना घर खाने में उन्हें सोचना पड़ता है यह हालात इस देश के निर्मित हो रहे हैं हृदय का स्थान देना चाहिए आज वो डोर मेट बने हुए हैं पायदान बने हुए हमारे घर के दरवाजे पर ध्यान रखना आज बुध अपने बच्चों के साथ तो राहत है लेकिन वैसा नहीं राहत जैसे बच्चे बचपन में उसके साथ रहा करते थे एक बात याद रखना मां-बाप को जिंदगी में दो बार बहुत दुख होता है बहुत दुख होता है केवल दो बार ऐसा दुख होता है इससे बड़ा दुख मां आप के जीवन में कभी नहीं आता है पहले दुख तो तब होता है जब अपनी ही बेटी बड़ी हो जाति है और बड़ी होकर जब डोली पर उसे विदा करता है ना तो चट्टान से चट्टान हृदय आप की आंखों में भी आंसू के जलने फुट पड़ा करते हैं उसकी भी आंखें भर आई है अपनी बेटी जब ससुराल जाति है दो डोली में बिठाने है विदा होती है बेटी पहले बार मां-बाप को दुख होता है जब बेटी घर छोड़ती है और उससे भी ज्यादा दुख होता है जब बेटा बुढ़ापे में मुंह मोड़ता है मां-बाप को बहुत दुख हुआ करता है अपने जिंदगी में जब स्वार्थिपन का प्रमाण पत्र दिया जाता है जब मां-बाप को राजू पर ओला जाता है जब मां-बाप को बुढ़ापे में प्रमाण पत्र मिलता है क्या आज बेटा कहता है आप से इस शब्द सुनते हुए का नहीं सकता कुछ चुपके चुपके
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