पुलक सागर जी का हृदयस्पर्शी प्रवचन | बुद्ध की विरासत
महात्मा बुद्ध की विरासत: धन नहीं, संस्कार छोड़कर जाइए | आचार्य श्री पुलक सागर जी प्रवचन आज के समय में अधिकांश लोग अपने बच्चों के लिए धन, जमीन, मकान और बैंक बैलेंस जोड़ने में लगे रहते हैं। हर माता-पिता चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ी को किसी प्रकार की कमी न रहे। लेकिन क्या केवल धन ही असली विरासत है? क्या संपत्ति देकर कोई व्यक्ति अपने कर्तव्य से मुक्त हो जाता है? इन्हीं गहरे प्रश्नों का उत्तर आचार्य श्री पुलक सागर जी ने महात्मा बुद्ध के जीवन की एक अत्यंत मार्मिक घटना के माध्यम से समझाया है। यह प्रसंग केवल इतिहास नहीं, बल्कि हर परिवार के लिए जीवन का दर्पण है। ज्ञान प्राप्ति के बाद बुद्ध का कपिलवस्तु आगमन जब गौतम बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ, उसके बाद वे अपने गृह नगर कपिलवस्तु लौटे। वहां उनका स्वागत राजा शुद्धोधन ने किया। यह वही पिता थे, जिन्होंने कभी अपने पुत्र को राजकुमार की तरह पाला था। लेकिन आज दृश्य बदल चुका था। पुत्र अब राजा नहीं, बल्कि एक संन्यासी और ज्ञानी पुरुष बन चुका था। कहा जाता है कि राजा शुद्धोधन ने अपने पुत्र के चरणों का प्रक्षालन किया। यह घटना बताती है कि जब व्यक्ति आत्मज्ञान ...