परिवार क्यों टूट रहे हैं? आचार्य पुलक सागर जी का गहरा संदेश
“जो घरों का बँटवारा कराती है, वो बहू होती है” जब सावन का पावन महीना आता है, तो मन स्वतः ही भावनाओं से भर उठता है। कहीं न कहीं हर व्यक्ति के दिल में अपने भाई-बहन के रिश्ते की मधुर स्मृतियाँ जाग उठती हैं। बहन को अपने भाई से मिलने की चाह, राखी बाँधने की भावना और भाई के स्नेह की यादें मन को भावुक कर देती हैं। लेकिन इसी भाव को समझते हुए यह भी सोचना चाहिए कि जैसे एक बहन का अपने भाई से मिलने का मन करता है, वैसे ही एक पति का भी अपने भाई-बहनों से मिलने का मन करता होगा। वह भी अपने भाई से दो बातें करना चाहता होगा, कुछ प्यार के शब्द साझा करना चाहता होगा और अपने रिश्तों को समय देना चाहता होगा। रिश्ते किसी एक दिशा में नहीं चलते, बल्कि हर व्यक्ति के अपने-अपने पारिवारिक बंधन और भावनाएँ होती हैं, जिन्हें समझना जरूरी है। लेकिन आज के समय की बदलती परिस्थितियों में कई बार रिश्तों के बीच दूरी और संकोच भी देखने को मिलता है, जहाँ लोग अपने भावों को खुलकर व्यक्त नहीं कर पाते। ऐसे में कई बार घरों में छोटे-छोटे प्रयासों के माध्यम से अपने प्रियजनों को उपहार देकर रिश्तों को निभाने की कोशिश की जाती है। इन्हीं स...