क्या महानता जन्म से मिलती है या कर्मों से? ~ आचार्य श्री पुलक सागर जी महाराज
जब पूरी नगरी ने कहा – "तुम वर्धमान नहीं, महावीर हो!" | 🌸 क्या महानता जन्म से मिलती है या कर्मों से? दुनिया में लाखों बच्चे जन्म लेते हैं, लेकिन कुछ ही ऐसे होते हैं जिनका जीवन युगों तक लोगों को प्रेरणा देता है। भगवान महावीर भी एक बालक के रूप में ही इस धरती पर आए थे। उन्होंने भी मां की गोद में खेला, पिता की उंगली पकड़कर चलना सीखा और बचपन की नटखट लीलाओं से पूरे महल को आनंदित किया। लेकिन उनके जीवन का उद्देश्य केवल जीना नहीं, बल्कि पूरी मानवता को दिशा देना था। 👶 भगवान भी मां की कोख से ही आते हैं आचार्य श्री पुलक सागर जी महाराज बताते हैं कि प्रकृति का नियम सबके लिए समान है। भगवान राम कौशल्या की कोख से आए। भगवान कृष्ण देवकी की कोख से आए। भगवान महावीर माता त्रिशला की कोख से आए। लेकिन मनुष्य जन्म की सार्थकता केवल जन्म लेने में नहीं है। "काम से पैदा हो जाओ, लेकिन राम में जियो और राम में मरो — यही जीवन की सफलता है।" 🌺 कमल की तरह बनो महावीर कथा का एक अत्यंत सुंदर संदेश है— कमल की नियति कीचड़ में जन्म लेना है, लेकिन कीचड़ में जीना उसकी नियति नहीं। वह...