क्या हर इंसान महावीर बन सकता है? सुनिए जीवन बदल देने वाली महावीर कथा | पुलक सागर जी
महावीर केवल मंदिरों में नहीं, हृदय में उतरने चाहिए आज हमने भगवान महावीर को मंदिरों तक सीमित कर दिया है। सोने-चांदी के सिंहासन बना दिए, भव्य मंदिर बना दिए… लेकिन उन्हें जन-जन तक नहीं पहुंचाया। गुरुदेव कहते हैं: “जब तक महावीर कानों तक नहीं पहुंचेंगे, तब तक हृदय तक नहीं पहुंचेंगे।” यही कारण है कि कथा की आवश्यकता है। कथा केवल मनोरंजन नहीं होती… कथा आत्मा का शुद्धिकरण करती है। धर्म ज्ञान से नहीं, कथाओं से हृदय में उतरता है लोग गीता से ज्यादा कृष्ण को जानते हैं। रामायण से ज्यादा राम को जानते हैं। क्यों? क्योंकि कथा हृदय से जुड़ती है। मनुष्य केवल दर्शन से नहीं बदलता… भावनाओं से बदलता है। इसीलिए महावीर की कथा सुनना जरूरी है। आज मन मंदिर में नहीं, मोबाइल में रहता है गुरुदेव ने आज के समाज की सबसे बड़ी सच्चाई सामने रखी। उन्होंने पूछा: “तुम सबसे ज्यादा किसके साथ रहते हो?” उत्तर साफ था — मोबाइल। आज भोजन करते समय मोबाइल… दुकान में मोबाइल… यहाँ तक कि कथा में भी मोबाइल… लेकिन याद रखिए: “मोबाइल से Smile नहीं आती… महावीर जीवन में आ जाएँ तो बिना मोबाइल के भी चेहरे पर मुस्कान ...