सिर्फ एक पुण्य और आत्मा का कल्याण | पुलक सागर जी प्रवचन
हज़ार पुण्य के बराबर कौन सा एक पुण्य होता है? जानिये धर्म की दुनिया में कुछ ऐसे पुण्य बताए गए हैं, जिनका फल हजारों पुण्यों के बराबर माना गया है। आचार्य श्री पुलक सागर जी ने अपने प्रेरणादायक प्रवचन में भगवान महावीर, राजा श्रेणिक और सत्संग के माध्यम से ऐसे ही गहरे धर्म रहस्यों को समझाया। यह केवल कथा नहीं, बल्कि आत्मा को मोक्ष की ओर ले जाने वाली प्रेरणा है। 🙏 राजा श्रेणिक की अद्भुत भक्ति जब मगध सम्राट राजा श्रेणिक को पता चला कि भगवान महावीर का समोशरण आने वाला है, तब उन्होंने अकेले दर्शन करने का विचार नहीं किया। उन्होंने पूरे नगर में घोषणा करवाई कि सभी लोग भगवान के दर्शन करने चलें। आचार्य श्री पुलक सागर जी बताते हैं कि 👉 सच्चा धर्मात्मा वही है, जो स्वयं धर्म करे और दूसरों को भी धर्म मार्ग पर साथ लेकर चले। धर्म केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज के कल्याण का माध्यम भी है। 🧠 जिज्ञासा भी एक बड़ा तप है प्रवचन में बताया गया कि राजा श्रेणिक ने भगवान महावीर से लगभग 60,000 प्रश्न पूछे। यह सुनकर आश्चर्य होता है, लेकिन आचार्य जी बताते हैं कि सही जिज्ञासा रखना और गुरु से...