महावीर स्वामी की गर्भ कल्याणक कथा | माता त्रिशला के पवित्र भाव और गर्भ संस्कार की अद्भुत सीख
जब मां की कोख मंदिर बन जाए… क्या कभी आपने सोचा है कि एक मां अपनी संतान को जन्म देने से पहले कैसी भावनाएं अपने भीतर रखती है? आज का समय ऐसा है जहां गर्भ में पल रहे बच्चे से ज्यादा ध्यान मोबाइल, टीवी और दुनियावी इच्छाओं पर दिया जाता है। लेकिन भगवान महावीर की गर्भ कल्याणक कथा हमें बताती है कि यदि मां के भाव पवित्र हों, तो वही गर्भ एक मंदिर बन जाता है। राष्ट्रसंत पुलक सागर जी ने इस कथा में केवल भगवान महावीर के जन्म का वर्णन नहीं किया, बल्कि पूरे मानव जीवन को बदल देने वाली सीख दी है। सम्यक दर्शन ही जीवन की असली दिशा है गुरुदेव बताते हैं कि जब तक जीव सही दिशा नहीं पकड़ता, तब तक वह भटकता रहता है। “अज्ञानी प्रतिकूलताओं का विरोध करता है, ज्ञानी उनमें मार्ग खोजता है।” यह केवल आध्यात्मिक बात नहीं है… यह जीवन का विज्ञान है। आज इंसान दुख से लड़ रहा है, परिस्थिति से लड़ रहा है, लोगों से लड़ रहा है… लेकिन रास्ता नहीं खोज रहा। महावीर कथा कहती है — भगवान की तरफ मुख कर लो, जीवन अपने आप बदल जाएगा। सोचने वाली बात हम पूरी जिंदगी पैसा कमाने में लगा देते हैं, लेकिन क्या कभी धर्म कमाने की कोशिश की? गुरुदेव कहत...