भटके हुए देवता से भगवान महावीर बनने तक की अद्भुत यात्रा
भटके हुए देवता से भगवान महावीर बनने तक की अद्भुत यात्रा क्या एक क्रोधी, प्रतिशोध से भरा और हिंसा में डूबा जीव भी भगवान बन सकता है? क्या भटक चुका इंसान फिर से सही रास्ते पर लौट सकता है? इन्हीं गहरे प्रश्नों का उत्तर अपने ओजस्वी और भावपूर्ण प्रवचन में आचार्य श्री पुलक सागर जी महाराज ने दिया। यह केवल एक कथा नहीं, बल्कि आत्मा को जगाने वाली आध्यात्मिक यात्रा है — मारीच से महावीर बनने की यात्रा… भटकन से भगवान बनने की यात्रा… ✨ 🌸 जिनवाणी की महिमा से हुआ प्रवचन का शुभारंभ प्रवचन की शुरुआत भक्ति, संगीत और जिनवाणी की महिमा से होती है। पूरा वातावरण “ॐ नमः सिद्धेभ्यः” और “मंगलम भगवान वीरो” के दिव्य उच्चारणों से भक्तिमय हो उठता है। 🙏 महाराज जी बताते हैं कि जिनवाणी केवल शब्द नहीं, बल्कि आत्मा को जागृत करने वाली शक्ति है। ⚔️ प्रतिशोध — मनुष्य के पतन का सबसे बड़ा कारण महाराज जी कहते हैं — “तुमने हमारा बुरा किया तो हम भी तुम्हारा बुरा करेंगे — यही प्रतिशोध मनुष्य के पतन का कारण है।” जब तक मन में बदला, अहंकार और द्वेष है, तब तक मोक्ष बहुत दूर है। उन्होंने समझाया कि महावीर बन...