कैसा भी भयंकर दुःख हो आपके जीवन में ये वीडियो सुनकर खुशी से भर जायेगा जीवन। पति-पत्नी जरूर सुनें
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ऐसा संत कौन होता है जो संतुष्ट होता है वो संत होता है और जो असंतुष्ट होता है वे असत हुआ करता है वह ग्रस्त हुआ करता है वह संसारी हुआ करता है सब कुछ तुम्हारे पास है अपना तो अपना है पड़ोसी का मिल जाए तो वो भी थोड़ा सा ब्रेक लगाइए इच्छाओं पर आकांक्षाओं पर एक बार क्या हुआ नारद का मां हुआ की चलो पृथ्वी लोक की परिक्रमा करके आते हैं नारद पृथ्वी पर आए पृथ्वी ग्रह पर आए इस मध्यलोक में आए भिखारी उन्होंने सुबह-सुबह भीख मांग रहा है भिखारी ने भी कहा की यार चलो आज तो मेरी जिंदगी की कुछ इच्छाएं पुरी हो जाए सामने से देखा की नाराजगी चले ए रहे हैं भिखारी ने कहा आज मेरी जिंदगी का कल्याण हो जाएगा आज नारद मिल जाएंगे मेरी जन्म जन्म की दरिद्रता दूर हो जाएगी भिखारी गया नारद ने कहा क्या रे भाई कहां घूम रहा है बोले देखो मैं कहानी भी घूम रहा हूं सुबह-सुबह तुम मिले हो मेरे मोहनी मत बिगड़ना बोले क्या मतलब बोले जो भी है मेरे इस कटोरा में दाल दो तुम्हें आज का जीवन अच्छे से कैट सुकून आज का दिन मेरा शांति से गुर्जर जाए मेरे बच्चों का पेट भर जाए मेरी पत्नी का पेट भर जाए इस कटोरा में जो भी तुम्हारे पास तो दाल दो नरक ने कहा यार तूने मांगा भी तो किस मांगा मेरे से मांगा अब हम साधु संत सन्यासियों के पास क्या है देने के लिए अरे बोले जो भी हो इस कटोरा में दाल दीजिए अरे कुछ नहीं है आदमी ऐसे ही हो गया है एक सेठ वेट की अखबार पढ़ रहा था लोन में बैठकर एक भिखारी पहुंच गया बेकरी ने कहा की सेठ जी जो तुम्हारे पास हो मेरे जो कटोरा में दाल दो सेठ ने का क्या क्या समझ रखा है जो तुम्हारे पास हो बोल क्या चाहिए उन्हें कहा रोटी नहीं है इतनी सुबह से रोटी मिल जाएगी तुझे मेरे पास रोटी नहीं है तो उसने कहा एक कम करो सेठ जी एक गिलास ठंडा पानी दाल दो बोले चल पानी भी नहीं है अभी नल नहीं आया पानी कहां से दे डन तो उसने कहा है आपको सोचना है एक सेठ था उसका बहुत बड़ा महल सोनी का मिट्टी पे खड़ा होता है महल सोनी का मिट्टी पे खड़ा होता है ध्यान रखिए विचार करना है आपको और एक दिन वही महल होता है और एक दिन वही महल मिट्टी में मिला होता है और वचन इंसान का तराजू से तौलना वालों आदमी तन से नहीं आदमी मां से बड़ा होता है शरीर का वजन बढ़ाने से कोई बड़ा नहीं हो जाता है मां आदमी का वजनदार होना मां के बड़े बाली हैं नारद को बड़ी दया आई उसे भिखारी पर नारद ने कहा की यह कम कर चल मेरे साथ तुम्हारे साथ जान का क्या मतलब है मैं सन्यासी हो जाऊं मुझे नहीं सन्यासी नहीं होना तूने ये कटोरा फैलाया है चल मैं तेरा कटोरा आज भरवा देता हूं हरि बोले तू कौन भरेगा मेरा कटोरा बोले चल मेरे साथ स्वर्ग में चल धनपति कुबेर से कहूंगा वो तेरा कटोरा भर देगा इंद्र से कहूंगा वो तेरा कटोरा भर देगा भिखारी ने कहा की बाबा एक बात ध्यान रखना कहां ले जा रहे हो बोले स्वर्ग ले जा रहे हो उसने कहा नहीं जाना स्वर्ग जान के लिए स्वर्गीय होना बहुत जरूरी है और मैं अभी स्वर्गीय होना अरे नारद ने कहा यार पहले बार दुनिया में घटना घटेगा तुझे मारे बिना मैं स्वर्ग प्रधान कर रहा हूं चल मेरे साथ तुझे वहां रहना नहीं है स्वर्ग में रहने के लिए स्वर्गीय होना पड़ता है मैं तेरी इंद्र से मुलाकात करता हूं वो तेरी इस जन्म की दरिद्रता दूर भिखारी ने कहा नारद जी में चल तो सकता हूं तुम्हारे साथ तो फिर बोले क्या दिक्कत है चला क्यों नहीं है लेकिन बोले एक बात बता दो बोले क्या बोले आपके इंद्र महाराज के पास इतनी दौलत है की मेरा कटोरा भर सके नारद ने कहा मूर्ख कहानी का नालायक आदमी तुझे इतना भी ज्ञान नहीं है इंद्र का भंडार यह भंडार कुबेर का कभी ना खाली हो जो खर्चेतेव क्यों पड़े दिन दिन दुनो इंडो तो उठा ला इंद्र एक आजा में तेरा कटोरा हीरे मोती से भर देगा उन्हें हीरा मोती से बाल देगा बोले भर देगा उसने कहा यार तू भिखारी कैसी कैसी बातें करता है कटोरा खाली नहीं रहेगा चल मेरे साथ तुझे ध्यान रखना यदि इंद्र के पास ले जा रहे हो पूरा पूरा भरना क्या इस मूरत करोड़ अर्बन के हीरे मोती पड़े हुए हैं तेरा कटोरा भरने में कितनी डर लगेगा लेकिन भिखारी की सोच तो भिखारी जैसी रहेगी लेकर के गए इंद्र के पास इंद्र ने जैसे ही देखा नारद ए रहे हैं अब नाराज जहां पहुंच जाए तो उपद्रव तो खड़ा हो नहीं होना है शांति तो भांग हो नहीं है उसने एक नरेंद्र ने कहा यार नारा तुम आए तो आए लेकिन एक बात बताओ मुन्नी बार ये साथ में भिखारी को लेकर के हूं ए गए हो आपने मर्यादाएं तोड़ दी आपने साड़ी व्यवस्थाएं अनुशासन भांग कर दिया मारे बिना इसे स्वर्ग क्यों ले आए अरे नारायण ने कहा की इंद्र महाराज कोई बात नहीं चलो मेरे साथ ए गया संत दरस का यही फल होता है की जीते जी स्वर्ग मेरे साथ ए गया है एक कम करो इंद्र ने कहा नाराजगी जल्दी बताओ इस आफत को क्यों उठाके ले उसे भला तो आफत नहीं है भिखारी है बेचारा मांग रहा है कल बोले कहे का भिखारी आदमी है और ये आदमी यदि दो दिन भी यहां र गया तो मेरे स्वर्ग को नरक बने में ज्यादा डर नहीं इसे जल्दी दफा करो इतना सा कटोरा लेक घूम रहा है क्या बिगड़ा है तुम्हारा इंद्र ने कहा कोई बात नहीं इसे जो देना है वह दे दो लेकिन ज्यादा डर इस आदमी को स्वर्ग में रखना खतरनाक है इसे वापस लोक में भेज दिया जाए इंद्र ने कुबेर को आदेश किया की जो और इसका कटोरा हीरे मोती से भर दो अधिकारी ने कहा ठहरो इंद्र महाराज बोलने के पहले सोच लेना बोले क्या सोच लेना बोले यह कटोरा भरेगा या नहीं भरेगा अरे इंद्र ने कहा किस पागल को उठा लाया इतना सा कटोरा तेरा भरेगा या नहीं जो कुबेर भर दो इसका कटोरा कहते हैं सुबह से शाम हो गई कटोरा में हीरे मोती डालते जा रहा डालते जा रहा डालते जा रहा कटोरा खाली का खाली अरे इंद्र ने कहा देखो नारद मैंने कहा था ना इस आदमी को ले आए वो खड़ा कर रहा है देखो अभी तक कटोरा नहीं भर रहा और लो और लो लेट गए लेट गए कटोरा भरत गया भरत गया लेकिन जैसे ही दूसरा समाज लेने जाए कटोरा थाली का अरे नारद ने कहा यार तू बात क्या कर रहा है बार-बार कटोरा कटोरा की ये तेरा कटोरा भरत क्यों नहीं है अब भिखारी ने कहा देखो नारद जी मैंने कहा था ये भर जाना चाहिए तुमने कहा था इंद्र के पास इतना है की कितने भी कटोरा भर देगा अब भरे मेरा कटोरा नारद ने कहा भाई इधर अल्लाह तेरा कटोरा कौन सी कंपनी में बना है कहां से खरीद के लाया है कहां से मिला ये कटोरा तुझे ये देख कर रखा है जो सर माल बारामती में गिरी जा रहा है गिरी जा रहा है गिरी अरे बोले कोई छेद नहीं है तो कटोरा तू लाया कौन सी दुकान से है बोले अतुल भाई के मॉल से फैक्ट्री में कर क्या दिया की कटोरा भारी नहीं रहा है उसने कटोरा ला जैसे ही कटोरा नारद ने देखा नारद ने कहा मेरे आप तू मुझे पहले ही बता देता तो मैं तुझे यहां लेक नहीं आता बोले बता ये कटोरा कहां मिला तुझे अरे वो कहा मिला सुबह-सुबह जा रहा था भीख मांगने एक शमशान से गुजर शमशान से गजरा तो ये आदमी की खोपड़ी पड़ी हुई थी मैंने भीख मांगने का कटोरा बना लिया है नारद ने कहा की पागल साड़ी दुनिया को भरना आसन है लेकिन आदमी की खोपड़ी को भरना बहुत का ये नहीं भर शक्ति है तीन लोक की संपदा भी दाल दो आदमी की खोपड़ी कभी भरने वाली कितना भी दाल दो खोपड़ी जब देखो तो खाली की खाली रहा करती है
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