जिस घर में होता है ज्यादा झगड़ा वो पति पत्नी एक बार सुन लेंगे तो हमेशा के लिये हो जाएगा झगड़ा खत्म

 


जिस घर में होता है ज्यादा झगड़ा वो पति पत्नी एक बार सुन लेंगे तो हमेशा के लिये हो जाएगा झगड़ा खत्म


आज कोशिश होती है बेटा जा कुछ दिन रहना आई एम सेपरेट सेपरेट स ससुर अलग खाने का अवसर ही नहीं है पुणे में जब कर रहा है कर दिन राहत नहीं बहू को लेकर चल देता है अब क्या करें स भी कभी नहीं देव हटा दो यह नारा स पहले भी बहुत थी और आज भी बहू है वो कभी स नहीं बन पाएगी ध्यान रखना है वो जिंदगी भर बहू ही रहेगी विचार करना है यार कैसे लोग थे एक नई यदि संकल्प ले ले की मैं अपने परिवार को नहीं बिकने दूंगी तो मैं कहता हूं जो नई संकल्प ले लेती है फिर दुनिया की कोई बुरी नजर उसके परिवार को तोड़ नहीं सकते हैं फिर कोई मां तंत्र की जरूर नहीं कोई वास्तु सुधारने की जरूर नहीं है किसी ज्योतिषी के पास जान की जरूर नहीं है कोई नाग और नागिन पहने ने दी है क्या कभी अपना मां बादल लो घर का वास्तु अपने आप बादल जय करता है घर की व्यवस्थाएं अपने मां खराब है तो वास्तु कहते वास्तु से मां खराब है यदि मां अच्छा है तो कहां जाता है ना मां चंगा तो कठौती में ध्यान रखना मां को पवित्र रखो मां को अच्छा रखो मां को पवन बनाकर के रखो इतनी महिलाएं में यहां पर बैठी हैं इतने श्रावक बंधु यहां पर बैठे हैं हमारा देश त्योहार मनाने में बहुत मां है एक से एक त्योहार आते एक जाता नहीं दूसरा ए जाता है दूसरा नहीं जाता तीसरा ए जाता है देखा नहीं आज एक अंकल भाई दूजा जाति है 15 दिन होते हैं एक पक्ष में आज एक कम कल भाई दूजा जाति है दूज गई नहीं की अखा तीज ए जाति है अखा तीज गई की गणेश चतुर्थी ए जाति है चतुर्थी गई तो ऋषि पंचमी ए जाति है ऋषि पंचमी गई तो चंदन छाता जाति है चंदन छठ गई तो मोक्ष सप्तमी ए जाति है और मोक्ष सप्तमी गई तो अष्टमी ए जय करती है अष्टमी गई तो रामनवमी ए जाति है रामनवमी गई तो विजयदशमी ए जाति है विजयदशमी गई तो बक्शी डॉल ग्यारस ए जाति है ढोल गया रस बरस गई तो धनतेरस ए जाति है फिर रस गई तो अनंत चतुर्दशी ए जाति है और चतुर्दशी गई तो ए जाति है दिवाली अब बता कौन सा दिन खाली अपने हाथों हर दिन त्योहार हर तिथि में त्योहार है एक बेटी थी खाली मिली क्या हर तिथि में त्योहार है हमारी समाज की महिलाएं आठ आठ दिन 10-10 दिन के ऊपर करते गरबे मुझे अपनी संस्कृति पर क्या जितनी तपस्या जैनियों के पास है ईमानदारी से उतनी तपस्या किसी के पास नहीं है ध्यान रखें कितना कठोर तप करते हैं एक-एक साल उपवास धरण कर लिया करते हैं 10 लक्षण नहीं करती हैं करण के मीना मीना के सहन करती है आपकी इन आदतों पर मुझे गर्व हुआ करता है मुझे फक्र है की हमारी समाज का बच्चा जब कोई त्योहार जैनियों के आते हैं तो अच्छा खाना अच्छे पीने के लिए नहीं रोटा वो एक आसन करने के लिए रोटा है वो वास करने के लिए रोटा है वो कहता है मां आज मैं एक टाइम भजन करूंगा आज मैं उपवास करूंगा गरबे इस परंपरा पर लेकिन दुख है मुझे इस बात का गर्व के समीदा केवल इतनी है की लॉज इस्लामिकाएं जो श्रावक बरसी तप करते हैं 10 लक्षणों के उपवास करते हैं हरीद दस-दस दिन एक-एक साल एक-एक महीने भूख प्यास सहन कर लेते हैं लेकिन दुख इस बात का है ये भूख से आप सहन करने वाली नई घर की दो बात सहन नहीं कर पाती है ध्यान रखना मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं केवल भूख प्यास सहन करने का नाम उपवास नहीं होता है किसी ने दो बातें कर दी चुपचाप सहन कर लो इससे बड़ी तपस्या दुनिया में कोई दूसरी रहने का नाम उपवास नहीं होता है किसी ने कुछ का दिया बिल्कुल तैयारी खड़ी खूब लड़ी मरदानी वह तो यहां की महिलाएं नहीं औरंगाबाद वाले ध्यान रखिए दो बात सहिष्णुता नहीं है हमारे जीवन में सहनशीलताएं नहीं है और यही वजह है की परिवार बड़ा हो या छोटा हो स ससुर के साथ रहो तो वहां झगड़ा होते हैं देवरा जीवदानी के साथ रहो तो वहां झगड़ा होते हैं उनसे भी अलग हो जो तो पति पत्नी में झगड़ा झगड़ा से मुक्ति नहीं मिला करती है ध्यान रखना इतने लड़ते हैं इतने लड़ते हैं इतने लड़ते हैं की तलाक के करण तलाक बात बात पर घर छोड़ देना बात-बात पर मैं मा जाऊंगी आत्महत्या कर लूंगी भाई भाई की बात कभी नहीं काटना चाहिए कर भाई रहते हो दो भाई घर में रहते हो बड़े भाई ने जो कहती बात ऐसी व्यवहार यदि जीवन में बन गया क्या दिक्कत है एक कम ही गड़बड़ होगा होने दो ना भाई का मां तो गड़बड़ नहीं होगा ना मेरे भाई ध्यान रखना अरे कम बिगड़ जाए तो फिर से सुधार जाता है भाई का मां बिगड़ जाए तो फिर जिंदगी भर नहीं सुधार करता है ध्यान रखना एक दूसरे के समाज का ध्यान मत रखो एक दूसरे के व्यापार का ध्यान मत रखो और ये लाभ हनी का ध्यान मत रखो घर को स्वर्ग बनाना है संबंध मधुर करना है एक दूसरे के मां का ध्यान रखो मेरे भाई यदि मां अच्छा है मां पवित्र है क्या होगा एक घंटा लगेगा ग जाएगा लेकिन दो गली बोल के दो अब शब्द बोल के भाई का मां तोड़ने का दुशास कभी मत करिए जीवन में भाई से बड़ा कोई और नहीं हुआ कहता है उसमें दिलबर राहत है दिल मत तोड़ी मंदिर टूट जाए कोई बात नहीं मस्जिद टूट जाए कोई बात नहीं मकान टूट जाए कोई बात नहीं दिल नहीं टूटना चाहिए ध्यान रखना मंदिर टूटे फिर बन जाता दिल को कौन बनाएगी दिलों को संभल कर जीने का प्रयास करें कभी मत काटो भाई भाई की बात 


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