मांस खाने वाले लोगों के साथ नर्क में क्या होगा । एक बार जरूर सुन लेना उस दर्द से गुजरने से पहले
मांस खाने वाले लोगों के साथ नर्क में क्या होगा । एक बार जरूर सुन लेना उस दर्द से गुजरने से पहले
हमें तो एक घंटे में ही सब निपटाना है कहां है की भजन के एक घंटे बाद तक पानी मत पियो यदि स्वस्थ रहना है पूछा गया की एक घंटे तक पानी क्यों ना पिए कैसे चलेगा भजन की पाचन क्रिया होती है उसे चतर कहते हैं और जठर में एक अग्नि जलती है जिसे चाट रागनी कहते हैं भजन जब बंता है रसोई में तब भी आज में पटा है लेकिन वह अभी पूरा पाक नहीं है हकीकत में तो भजन आज में पकाने की बात पेट के भीतर जो जठराग्नि है वहां जाकर के भजन का फिर से पाचन होता है फिर से उसे भजन को उसे अग्नि में पचाया जाता है और जो लोग भजन के बाद पानी पी लेते हैं तुरंत तो कहते हैं पानी और आज का बेर हुआ करता है आज को पानी बुझा दिया करता है यदि पानी को आप पी लेंगे तो वह चाट रागनी को शांत कर देगा और जात रागनी यदि ठंडी पद गई तो भजन पड़ा पड़ा सड़ता रहेगा वह पाचन क्रिया नहीं हो पाएगी इसलिए जिन लोगों को निरोग रहना है ऐसा आयुर्वेद शास्त्र में देख रहा था उसमें लिखा की पानी कभी भी भजन के तुरंत बाद नहीं पीना चाहिए यदि आपको स्वस्थ रहना है यदि आप इस भीम से चलेंगे तो शायद आपको डॉक्टर के पास जान की जरूर ना पड़ेगी दूसरा नियम उसने बताया बड़ा मजा चाहता हूं मुझे पढ़ने में की पानी एक घंटे बाद जब आप पिए तो ठंडा पानी नहीं पिए ठंडा से मतलब उबलता हुआ नहीं ग्राम किया हुआ ठंडा पानी है अब आप बोलिए भगवान महावीर भी अपने साधकों के लिए का कर गए कच्चे पानी का जीवन में उपयोग नहीं करना चाहिए पानी छानकर के और उबालकर के फिर ठंडा हो जाए फिर उसे पानी को आप पीजिए आपको कभी बीमारी नहीं आएगी तीसरा नियम बताया की पानी जब भी पिए तो ऐसा गत गत करके ना पिए पानी जब भी पिए तो चाय की चुस्कियां की तरह पिए थोड़ा थोड़ा पानी पिए इकट्ठा जो पानी पीते हैं उनके बीमारियों का जन्म हो जय करता है यह तो हुई एक भजन की भीम की हमें कैसा भजन करना चाहिए चुस्की में पानी इसलिए पियो और सबसे पहले उठाते ही साथ आदमी को पानी पीना चाहिए क्योंकि जो मुक्ति लर होती है वह शहर होती है वो पेट में अम्ल बनाकर के जाति है तो वह अम्ल को शांत करती है और पेट को बहुत अच्छा रखती है यह नियम जो बतलाएं गए मान्यवर मैं तो पालनपुर कर नहीं पाऊंगा क्योंकि मेरी तो आहार की भीम ऐसी है की मुझे तो सब कुछ इस समय करना है 24 घंटे में एक बार तो यह सारे नियम मैं का सकता हूं जो दिन भर भजन करते हैं उनके लिए आयुर्वेद शास्त्र में लिखा था इस तरह से भजन करें भगवान महावीर ने तो अपने साधुओं को कहा की 24 घंटे में एक बार ही भजन करना इस समय अन्य इस समय भजन इस समय पानी जो 24 घंटा में एक बार करते हैं उनके आहार पचाने की भीम अलग होती है और जो दिन भर भजन करते हैं उनके बचाने की भीम अलग हुआ करती है दोनों के सिस्टम अलग है लेकिन मैं आपसे यही निवेदन करूंगा भजन यदि इस कम से लिया जाएगा आपके जीवन में कहा है आयुर्वेद शास्त्र में कहा है उसके घर में कभी बेड नहीं आते हकीम नहीं आते डॉक्टर नहीं आया करते हैं आप स्वस्थ भजन करिए आप शुद्ध भजन करिए आप शाकाहारी भजन करिए मां साहब 1000 हजार रोगन को जन्म दिया करता है मान्यवर भारत की संस्कृति है भगवान ऋषभदेव ने दो संस्कृति दी एक ऋषि की संस्कृति दी और एक कृषि की संस्कृति थी ऋषि इस देश की आत्मा है और कैसी उसका शरीर है ऋषि और कृषि के संस्कृति और सभ्यता में रहकर आदमी यदि अपना खान-पान नहीं सुधार पाया तो एक बात याद रखना जिनका खान पान शुद्ध नहीं होता उनका खानदान शुद्ध नहीं होता और जिनका खान-पान शुद्ध होता है उनका खानदान शुद्ध हुआ करते शुद्ध रखिए भजन की क्या खाना कब खाना कितना खाना एक बार खाए सो योगी दो बार खाएं शुभ होगी तीन बार खाए सो रोगी और कर बार खाएं तो मृत्यु जरूर होगी ध्यान रखना हमेशा ज्यादा खाने वाला मरता है अस्पतालों में जाकर देखना एक व्यक्ति ने मुझे पूछा की महाराज आप 24 घंटे में एक बार अन्य जल लेते हैं आप कैसे इस जीवन को जीते होंगे मैंने कहा ध्यान रखना खाने वालों से ज्यादा अच्छा हमारा जीवन हुआ करता है और आपने जिंदगी में कभी यह नहीं देखा होगा की किसी जवान संत की मौत हो गई रे कभी जबी कोई दुर्घटना घाट जाए बाकी हर संत अपनी पुरी आयु जिया करता है वह समय से पहले मृत्यु को प्राप्त नहीं होता है और वैज्ञानिक कहते हैं एक भी ग्रस्त ऐसा नहीं है इस युग में जो अपनी पुरी मौत की पुरी जिंदगी जीता हो हर आदमी अपनी लाई हुई आयु में से कुछ कम ही जीवन जीता है और दुनिया से विदा हो जय करता है यदि आप 100 वर्ष की लेकर आए हैं तो साइंस कहता है आप 90 साल ही जी पाएंगे 95 साल ही जी पाएंगे आप 100 वर्ष नहीं जिएंगे 100 वर्ष वही जिएगा जो अपना खान-पान और अचार विचार अच्छे रखना है वह दीर्घायु हुआ करता है और जिसका खानपान अच्छा नहीं होता वह समय से पहले दुनिया से विदा हो जय करता ध्यान रखें
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