घमंड करने वालों के साथ क्या करते हैं भगवान । आप भी करते हैं घमंड तो जरूर सुनें वरना पछताओगे जीवन भर


घमंड करने वालों के साथ क्या करते हैं भगवान । आप भी करते हैं घमंड तो जरूर सुनें वरना पछताओगे जीवन भर

 भारत गौरव आचार्य श्री पलक सागर जी गुरुदेव के प्रवचन और लेटेस्ट धार्मिक भजन वी कार्यक्रम निशुल्क देखने वी सुनने के लिए हमारे युटुब चैनल मीडिया को आज ही सब्सक्राइब करें और सबसे पहले देखने के लिए बेल आईकॉन पर क्लिक जरूर करें खुदा करें सोचा या मैं इतना सा ये इतना बड़ा क्या करूं मुझे भी हां ठीक है ए गया दिमाग में चढ़ गया तुम्हारे खोपड़ी में भी चढ़ता राहत है ना मुझे भी धनपति बन्ना है मुझे भी पैसे वाला बन्ना है मेंढक को भी ए गया मुझे बड़ा बन्ना है और कैसा बड़ा बन जाएगा ध्यान रखना शरीर बड़ा करने से कोई बड़ा थोड़ी हो जाता है ध्यान रखना विचार करना पहले सोनी का मिट्टी पे खड़ा होता है और एक दिन वो महल मिट्टी में मिला होता है और भजन इंसान का तराजू से तने वालों आदमी तन से नहीं आदमी मां से बड़ा होता है तन के बड़े हुए तो क्या हुए मां से बड़ा होना चाहिए मेंढक ने कहा मैं बड़ा हूंगा अब बड़ा कैसे हो जाए औलाद तो तू मेड की की है ख्वाब दे रहा है हां ठीक है हाथी जैसा बन जाऊं चलते कुत्ते चला गया होगा दिमाग फिर गया जब आदमी के अंदर कुछ धुन स्वर हो जाए ना तो फिर वो अपना नस और सर्वनाश नहीं देखा करता है उधर से गया क्या देखा है सड़क के किनारे एक आदमी पंचर बना रहा है साइकिल का पंचर बनाने के बाद उसने साइकिल में हवा भारी पंप से टायर भूल गया अरे उसने कहा मिल गया मुझे तो डॉक्टर बोले क्यों बोले जब जी हवा से टायर फुल सकता है बोले लुक्का जैसी खोपड़ी का होगा पुड़क के गया पंचर वाले से बोला ओ भाई बोले क्या बोले पाइप जरा मेरे मुंह में लगाते हैं बोले क्यों पागल है क्या दिमाग खराब है क्या तेरा अरे बोले लगा दे मुझे बड़ा बन्ना है अरे उसने कहा देख तो ज्यादा बड़ा अदा मत बन ज्यादा टेंशन मत ले आराम से जी तो जैसा है वैसा ही मेंढक ने कहा तो ज्यादा बकबक क्यों करता है हवा भर दे मेरे मुंह में अरे उसने कहा यार मां ही नहीं रहा जिद्दी है उसने लिया पाइप थस दिया उसके मुंह में और एक पंप मारा मेंढक के चारों पर फेल गए बोले बोल और कैच के उसने एक और दिया आंखें बाहर हूं और और तू तो भारत जा भारत है तीसरा पंप जब दिया उड़ गए उसके ध्यान फिर कहां से बड़ा बन जाएगा तुम भी कहते हो ना वो मेंढक कोई और नहीं बुद्ध और बुद्धि दादुर कोई और नहीं हमारी खोपड़ी में बैठा है और लो और लो और लो और लो और माला और सम्मान और स्वागत और नाम और पैसा और रुपया और और और तेरा और चलने का ध्यान नहीं है और और भरे जो भरे जो भरे जो उतनी बढ़नी जाति उतनी बढ़ते जाति है इच्छाओं पर कंट्रोल करो यहां तक यह पूछ में तेल लगे यार समझी नहीं आता है पूछ वाला तो फिर भी ठीक है लेकिन मूंछ वाले की पूछ बहुत ज्यादा लंबी हुआ करती है इसका कोई अंत नहीं हुआ करता है मुझे पूछिए ही नहीं मेरी इज्जत ही नहीं मेरा मां ही नहीं

आदमी अपना व्यवहार किस बिगड़ा है अहंकार से सरल स्वभावी हो ताकि घर बहू अच्छा व्यवहार बड़ा बन जाता है एक एगो से एगो हट होता है हमने किया उसने किया अहंकार से बचाने का एक बात और याद रखना जोड़ने कई नहीं कभी कभी छोड़ने का भी अहंकार हो जाता है छोड़ने का दिखाई नहीं दिया करता है नेपाली तराना की यात्रा पर था ब्रह्मचारी था डबल श्वेत वस्त्र धरण किया था मेरे साथ-साथ एक धवल वस्त्र में एक संत भी चल रहे थे उन्होंने मुझे पूछा तुम साधु हो इनका वेस्टन से कोई साधु नहीं बंता है मस्त रंगीन हो या सफेद हो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है फर्क तो पड़ता है हमारा मां कितना रंगीन है यात्रा मैंने कहा गजब बहुत अच्छी बात क्या छोड़ महाराज करोड़ की संपदा थी बड़े-बड़े मार्केट थे मेरे गाड़ियां चलती थी बीसियों नौकर जाकर थे मेरे बहुत बधाई मैंने कहा संत जी मुझे नहीं लगता की आप साधु हैं बोले क्यों इनका जो चीज 30 साल पहले छोड़ चुके उसे आज तक याद रखें हो जो याद रखा है वो संत नहीं हुआ करता है जैन दर्शन कहता है [प्रशंसा] कितना छोड़ वो बड़ा त्यागी नहीं होता है मां से छोड़ वो बड़ा त्यागी हुआ करता है क्या छोड़ लिया की हमने इतना छोड़ हम यह नहीं करते हम वो नहीं करते हमने कहा रात्रि भजन का त्याग है बोलिए अरे महाराज के ऐसी बातें करते हो अरे इनका क्यों मूली रात्रि भजन का त्याग स्वाद ही नहीं जाना रात में क्या भजन होता है जिंदगी बीट गई महाराज 50 साल हो गए रात में नहीं खाती अरे मीन का गजब अम्मा बोले 50 साल से रात में नहीं का रही हो 40 साल से आलू नहीं का रही हो 20 साल से प्याज नहीं का रही हो अरे मैंने कहा अम्मा बहुत गजब कर अरे महाराज विमल सागर महाराज को आहार दिया टी 35 साल हो गए बाजार का नहीं का रही हूं इनका गजब अम्मा और वो तो शुरू मेरा तो आहार खड़ी र गया की ये तो पूरा लिस्ट लेकर आई है की कब क्या नहीं कहती क्या नहीं खाती मैंने कहा अम्मा जी एक बात बता आहार के बाद मिली मैंने कहा एक बात बता दे अम्मा तू पूरे प्रवचन कर दिए तूने मेरे आहार में एक-एक गिलास तूने मेरा मुश्किल कर दिया खाना मैं ये नहीं खाती मेरे सुदर्जल का त्याग है मैं बिना देव दर्शन के पानी नहीं पीटी मैंने कहा अम्मा ये वाली लिस्ट रख एक तरफ ये बता तू खाती क्या क्या है बोले क्या मतलब मैंने कहा क्या-क्या का रही है उसकी लिस्ट दे जो नहीं खाती उसकी लिस्ट मत दे ध्यान रखना आदमियों को ये भी यही छोड़ने का है इनका त्याग का भी अहंकार होता है और एक बात याद रखना जोड़ने का अहंकार तो फिर भी उतना मजबूत नहीं होता छोड़ने का अहंकार उससे ज्यादा मजबूत हमसे बड़ा त्यागी कोई नहीं हमसे बड़ा तपस्वी कोई नहीं हमसे बड़ा अच्छा प्रवचनकर कोई नहीं हमसे ज्यादा पब्लिक जोड़ने वाला कोई नहीं हमसे ज्यादा दान निकलवाने वाला यही कर मां का ही नीचे डर अहंकार से बचाने का प्रयास करो अहंकार नहीं छुट्टा है 


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