जानिए सुखी जीवन के लिए क्या जरूरी है ? पति-पत्नी जरूर सुनें बदल जायेगा जीवन। 90% नही जानते लोग
जानिए सुखी जीवन के लिए क्या जरूरी है ? पति-पत्नी जरूर सुनें बदल जायेगा जीवन। 90% नही जानते लोग
और दूसरा जीवन अपने पति के घर का जीना पड़ता है उसे दो संस्कृत बनाना पड़ता है इसलिए ध्यान रखिए नई को बहुत संभल करके जिंदगी जीना परिवारों का जीवन जीना है दो संस्कृतियों को एक करना [संगीत] पीहर का व्यवहार अलग है और ससुराल का व्यवहार अलग हुआ करता है और दोनों को जोड़ने की यदि कल इस धरती पर किसी में है तो वो केवल नई में है यह शक्ति किसी पुरुष के पास प्राप्त नहीं हुआ करती है नई ही है जो दो सभ्यताओं को जोड़ शक्ति है नई ही है जो दो संस्कृतियों का मेल कर शक्ति है और दुनिया में नई ही है जो एक जन्म में दो जिंदगी जी लिया करती है वह केवल नई के बस की बात है आदमी के बस की बात नहीं है एक केवल महिलाएं कर शक्ति हैं ध्यान रखें इसे मां का रूप भी जीना पड़ता है इसे बहन का रूप भी जीना पड़ता है इसे पत्नी का रूप भी जीना पड़ता है इसे पड़ोसन का रूप भी जीना पड़ता है और इसे संसार का रूप भी जीना पड़ता है और ये वही नई है जिसे एक दिन धर्म का रूप भी जीना पड़ता कहानी जिंदगी जीतती है एक नई धन राखी बना शक्ति है घर को नरक भी बना शक्ति है एक परिवार को चलने के लिए नई की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है आदमी परिवार में कितनी डर राहत है दो-चार घंटे सुबह रहेगा दुकान चला जाएगा शाम को लौटेगा थक हर आएगा खाएगा पिएगा थोड़ा सा टीवी देखेगा और सो जो 24 घंटे तो आपको रहना है अपने घर में मैं आपसे निवेदन करता हूं महिलाएं मंदिर जाति हैं पूजा करती हैं पाठ करती है आदमी मंदिर जाता है भगवान के दर्शन भक्ति करता है मैं आपसे पूछ रहा हूं की जरा ईमानदारी से बताना मंदिर में आप कितनी डर रहा करते हैं कितनी डर लगाते मंदिर में पहले बार तो जाते ही नहीं होंगे और जाते भी हो तो कितना समय लगाते हो मंदिर में बताइए 5 मिनट डी तरह की आधा घंटा जान में लगता है 5 मिनट में निकाल आता है बाहर महिलाओं आप बताइए इनके कोई भरोसा नहीं है कितनी डर मंदिर में लगता है आधे घंटे 1 घंटा स्वाध्याय करो पूजा करो पाठ करो 1 घंटा लगता है अब मेरा आपसे केवल इतना ही आग्रह है और इतना ही निवेदन है की जी मंदिर में एक घंटे रहती हो उसे मंदिर को बड़ा पवित्र रखा जाता है उसे मंदिर की पवित्रता का ध्यान रखा जाता है मैं आज बारामती वालों से पेंशन चाहता हो की जी मंदिर में एक घंटे के लिए जाते हो उसे पवित्र बना के रखते हो तो फिर जी घर में 23 घंटे रहते हो उसे पवित्र क्यों नहीं बनाया करते हो 23 घंटे वाले को पवित्र बना लो ध्यान रखिए एक घंटे वाले की पवित्रता मंदिर जैसी पवित्रता घर में बना के रहे मंदिर में कितने शांत होते हो मंदिर में कितने अच्छे विचार होते हैं मंदिर में कितने धार्मिक हो जाते हो काश ऐसी जिंदगी घर में जीने लगा तो मैं पलक सागर कहता हूं की जिसने अपने घर के 23 घंटे वातावरण और स्वर्ग जैसे बना लिए उसे आदमी को फिर किसी मंदिर में जान की कोई आवश्यकता नहीं पड़ा करती है ध्यान रखें तेज घंटे वाले को पवित्र बना नसीब भगवान बनाता है और जैन दर्शन को देखो तो नसीब भाग्य से बंता है एक बात याद रखना किस्मत भाग्य से बंटी है किस्मत भगवान से बंटी है
किस्मत बनाना भगवान के हाथ में है और किस्मत बदलना भी उसके हाथ में वो हमारे हाथ में नहीं है लेकिन एक चीज तो हमारे हाथ में है की हम नसीब बादल पे या ना बादल पे लेकिन आदमी यदि ज्ञान गंगा महोत्सव में आकर के बैठ रहा है सुन रहा है प्रवचन को तो नसीब बदले या ना बदले आदमी अपना नेचर तो बादल सकता है अपना स्वभाव तो बादल सकता है अपना व्यवहार तो बादल सकता है यदि व्यवहार बादल गया तो मैं विश्वास दिलाता हूं की जी आदमी का व्यवहार और स्वभाव बादल जाता है उसके नसीब को बदलने में फिर ज्यादा डर नहीं लगा करती है व्यवहार बादल लीजिए
तंबाकू भर के पीते यह नहीं तुम तो जानते होंगे ना बोलो ना भाई जानते हो या नहीं जिसमें गंज अफीम भर के पी जाति है ना की नहीं इतने सीधे तो तुम नहीं हो जितने दिखाई दे रहे हो ध्यान रखना मैं इतनी सीधे बैठे हैं ऐसे हो जो तो मुझे गे को एक-एक घंटा ये प्रवचन करना पड़े बताइए एक एक चीज के मां में ना जान क्या आया उसका बुद्धि फ्री उसका दिमाग मेरा उसे मिट्टी को चिलम का आकर दिया कर देने के बाद उसके मां में ना जान क्या उसने लिया और चिलम को तोड़ दिया फिर तोड़ दिया फिर मिट्टी में मिला दिया मिट्टी ने पूछा की कुमार भाई तुम तो चिलम बना रहे थे मुझे आकर दे दिया फिर मुझे तोड़ क्यों दिया चिल्ला कुम्हार ने कहा बहन मेरा मां बादल गया मेरी बुद्धि बादल गई मेरा दिमाग बादल गया मेरी माटी बादल गई मैंने कहा विस्मृति से मैं चिलम नहीं बनाऊंगा अब इस मिट्टी से मैं सुराही बनाने का प्रयास करूंगा मैंने चिलम तोड़ दी और सुराही बना दी है मेरा मां बादल गया मेरी माटी ने कहा की चिलम मत बना बनाना है तो सुराही बना और मैंने चिलम का आकर तोड़ के सुराही का आकर दे रहा हूं सुराही बहुत खुश हुई उसने कहा कुम्हार भाई धन्यवाद तूने चिलम को कुमकुम सुराही बना दिया अरे कुमार भाई तेरी तो माटी बदली मेरी जिंदगी बादल गई मेरा जीवन बादल गया मैं तो बादल गए अरे चिलम बंटी तो खुद भी जलती और उसमें जो तमक होती है उसे भी जलती और पीने वाले को भी जल करके खाद कर देती मगर वो मेरी माटी बदली मेरी जिंदगी बादल गई तूने मुझे चिलम से सुराही बना दिया अब खुद भी ठंडा पानी पियूंगी और हजारों की प्यास बुझाऊंगी है तुम्हारे तूने मेरी जिंदगी को सुधार के रख दिया है ध्यान रखिए एक कुम्हार शराब का प्याला भी बना सकता है और एक कुमार उसे मिट्टी से मंगल कलश का निर्माण भी कर दिया करता है ध्यान रखना शराब का प्याला बनेगा पी जाएगी शराब और फेक दिया जाएगा और यदि उसे मिट्टी से वो कुम्हार कलश बना देता है तो कलश ऊंचे स्थान पर सम्मान को प्राप्त हुआ करता है मान्यवर ध्यान मिट्टी बहुत खुश हुई की तेरी माटी बदलने से मेरी जिंदगी बादल गई मैं मां आप से कहूंगा की आप भी कुमार की तरह हैं अपनी बेटी को आज लगाने वाली चिलम मत बना अपनी बेटी को पूजा का मंगल कलश बनाने का प्रयास करिए इतना पवित्र बना लिए कुमार के ऊपर डिपेंड है माता पिता के ऊपर डिपेंड है की आप अपनी बेटी को कौन सा रूप दिया करते हैं
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