जिस घर में स्त्रियों का सम्मान नहीं होता जानिये क्या होता है ऐसे घर के लोगों का। पुरुष जरूर सुनें
लेकिन इस घर ने हमें आज तक अपनाया नहीं क्या होता है क्या फर्क पड़ता है एक बात बताओ सासुओं से मैं पूछता हूं बेटी कब आई है तुम्हारे घर में गर्मी की छुट्टी है यहां रोज नाश्ता कौन बनाता है बेटी आके बनती है बहू बनती है बहू बनती है ना रसोई कौन बनती है बहू बनती है चलो नौकरानी होगी गुस्से से देगी बहू ही पड़ोसन देने ध्यान रखना कुछ भी करेगी खाना बनती है एक बात ध्यान रखो आप ईमानदारी से बताना एक संत की सभा में बैठे हैं बहुत ज्यादा कम करती है या बेटी ज्यादा कम करती ईमानदारी से बताना बहुत ज्यादा कम करती है ना तो उसके बाद भी बेटी प्यारी क्यों लगती है बहू प्यारी क्यों नहीं लगती है मैं ऐसे ज्यादा कम कर जीवन भर साथ रहा करती है एक बात याद रखना भारतीय संस्कृति में किसी भी बेटी को लक्ष्मी नहीं कहा जाता है बल्कि बहू को लक्ष्मी का कर के बुलाया जाता है किसी बेटी को किसी ने लक्ष्मी कहा है कन्या वाले का दिया जाए लेकिन लक्ष्मी का रूप नहीं दिया जाता है रक्षा वटी है तो बेटी की नहीं हाथों में दीप लिए हुए करती है रक्षाबंधन पर तो राखी बंद कर चली जाएगी मिठाई खागा मजे लेंगे लास्ट में बोल देंगे मजा नहीं आया तेरे की मा गए कर-कर के उनने का दिया मजाक नहीं आया बहुत तो घर में ही रहती है ना आज तक किसी बेटी की आरती किसी मां ने नहीं उतरी होगी लेकिन बहुत जब घर में आई है तो स को दीप लेकर उसकी आरती उतारना पड़ती है वो मंगल है बहुत सुबह है बहू लक्ष्मी का रूप है बहुत सरस्वती का रूप है जब मैं बहू घर में आई है तुम्हारे वंश को अंशदान करती है और जब उन्हें संस्कृत करती है तो यही बहुत सरस्वती का रूप हो जय करती है ध्यान रखिए और यही बहू लक्ष्मी का यानी लक्ष्मी को लात मारना के समाज पाप हुआ करता है जितने भी रिश्ते हैं आज तुम्हारा छोटा बेटा चाचा के अलावा है तो बहू की वजह से आज तुम ससुर जी कला रहे हो तो बहू की वजह से आज तुम सु मां कला रही हो तो ये रिश्ते तुमने नहीं उसे बहू ने आकर तुम्हें रिश्ते दिए हैं वो तुम्हारे वंश के अंश को यदि बढ़ाया है तो बहू ने बढ़ाया है किसी बेटी ने तुम्हारे वंश को आगे कर रहा है माला फेरना भगवान महावीर ने कहा है शरीर और आत्मा में भेद करोगी तो सब में दृष्टि हो जोगी बहू और बेटी में भेंट करोगी तो मिथ्या दृष्टि हो जोगी प्रवचन सुन लो कितनी भी समाज सेवा कर लो कितना भी धर्म कर लो यदि बहुत से नफरत करती हो तो आपकी पूजा पाठ सभी पाखंड है एक ढोंग है कुछ नहीं होने वाला इससे कोई कायाकल्प होने वाला नहीं है ये पूजा है तुम्हें स्वर्ग नहीं भेज शक्ति हैं ये पूजा है तुम्हें मोक्ष नहीं ले जा शक्ति है कितना भी कर लेना समाज में बड़ी-बड़ी माला पहने से कोई महान नहीं हुआ करता है हर एक बात याद रखना ये समाज की मलाई कोई हकीकत की नहीं हुआ करती है 80% तो धोखेबाजी हुआ करती है आपसे मैंने निवेदन करना चाहता हूं समाज के सम्मान में कोई व्यक्ति महान नहीं होता है अपने घर में जो सम्मान पता है वो दुनिया में महान है नजरों में उट ही दुनिया की नजरों में महान बन जो कोई कीमत नहीं हुआ करती है अपने घर की नजरों में ऊपर उठने का प्रयास करिए हाथ पर जोडी हो कुंडली मिलती हो मेरे लड़के की शादी कर दो एक कम करना युवाओं से मैं कहूंगा कुंडली कुंडली का एक अलग लफड़ा है इस चक्कर में कई कुंवारे घूम रहे हैं मैं आपसे इतना ही निवेदन करूंगा की अबकी बार कुंडली मिलाओ अपनी मत बिलाल किसी भी पंडित को दिखाना तो कहना जो लड़की मेरे घर ए रही देख उससे मेरी मां की कुंडली मिल रही है या नहीं मिल रही है मेरे पास उसे कितना रहना है सबसे ज्यादा तो सासु के साथ गड़बड़ है वहीं से होता है क्योंकि जो बहू आएगी अधिक से अधिक समय मैं परिवार में गुर्जर दी तुम्हारे साथ कितना गुजरेगी सुबह जाओगे थके हरे दुकान जाओगे शाम को लौटोगे दुकान से रात को घंटे दो घंटे बाद करोगे फिर नींद ग जाएगी फिर चले जाओगे गड़बड़ तो महाभारत कहां से शुरू होती है बहू के आने पर एक बात बताओ अपने अनुभव से पलटी है अपनी जीवन की दिशा से दृष्टिकोण से पाल के बड़ा करती है बच्चा मां के अनुसार पलटा है स्कूल से आता है मम्मी मेरा बैग कहां है मम्मी मेरे जूते कहां है मम्मी मेरे कपड़े कहां है मम्मी ने खाना कहा है मम्मी को ढूंढता है मम्मी कोई तो ढूंढ मम्मी मम्मी हर चीज में मम्मी बाजार चलना मम्मी शॉपिंग करना है मम्मी ध्यान रखना हर जगह मां के साथ घूमता है बच्चा याद रखना हर जगह तकलीफ नहीं होती वहां दुख है तो मां सुख है तो मां कहानी जाना है तो मां पापा इसके अलावा कुछ नहीं होता है लेकिन एक तकलीफ थोड़ी सी हो जाति है ना तो मां को तकलीफ होने लगती है जान बेटा मां को था अब बहुत से कम ऐसे हैं जो पत्नी के हवाले हो जय करते हैं और जब कोई कम जब कोई आवाज अपनी पत्नी को देता है और मां को नहीं देता थोड़ी सी तकलीफ हो जाति है शादी के बाद जितनी मुश्किल सांसों को होती है ना उससे ज्यादा मुश्किल लड़के को भी हुआ करती है ये मत सोचो की केवल बहू को एडजस्ट करने में वक्त लगता है परेशान होती है लड़कों को भी बहुत दिक्कत जब तक साथ शादीशुदा लड़कों से पूछो हमेशा कहते हैं इससे तो नहीं तुम क्यों बोल रही हो
उसे लड़के की क्या करें पत्नी के प्रति भाई लड़की हमारे घर में आई है वह लड़की का कौन है उसे घर में एक बात बताइए जो बहू आई है तुम्हारे घर में तुम्हारी तो बेटी भी है तुम्हारा तो छोटा बेटा भी है तुम्हारा तो बड़ा बेटा भी है तुम्हारा तो पति भी ऐसा कुछ तुम्हारा है उसका कौन है इस घर में भाई तो पहले बार आई है ना वो तो नहीं जानती वो किसी को नहीं समझती है तुम अपने बच्चे का नेचर समझती हो तुम अपनी लड़की का नेचर समझती हो बहुत की ट्यूनिंग तो किसी से नहीं मिलती है अब एक बात बताइए यदि वो बहू अपने इमोशनल को अपनी भावनाओं को अपने पति से शेर नहीं करेगी तो फिर किस करेगी किस अपनी बातें बताएगी किस अपने दिल की बातें बताएगी वो पराई घर से आई है उसे भी तो ट्यूनिंग मिलने में वक्त लगता है 5 साल लगता है 10 साल लगता है आप अपने बच्चे से बच्चे नहीं मिला पार्टी दो दिन में इस घर में एडजस्ट हो जो बस समय लगता है वह किस बोले अपने अच्छी बातें बुरी बातें ले देकर उससे पति से ही बोलना पड़ेगा किसी को किसके भरोसे आई है वो है एक पति के भरोसे आई है ना तो एक बहू यदि पति से समय मांगती है एक बहू अपनी भावनाएं यदि पति से शेर करती है मेरे भाई क्योंकि वो पुरी जिंदगी पति के भरोसे ही जीने के लिए वहां पर आई है आपसे मैं इतना ही निवेदन करूंगा लेकिन वो लड़की जो पराई घर से हमारे घर आई है उसके हर एक्शन का वैलिडेट किया जाता है वह क्या कर रही है कैसे बोल रही है कैसे चल रही है कैसे मिला रही है ज्यादा हंस रही है तो आफत है मैं हस्ती है तो आफत है रो देती है तो आफत है सुबह-सुबह जल्दी उठ जाए कम करें तो साजू कहती है डिस्टर्ब मत करो लेट हो जाए अभी तक सो रही है ध्यान रखना कितनी निगरानी रखते हो एक बहू पर थोड़ी सी जीवन को बादल लिए
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