5 मिनट में बदलेगा आपका भाग्य।बस हर रोज किया करें ये काम,भाग्य को बदलना है तो जरूर देखें

 


5 मिनट में बदलेगा आपका भाग्य।बस हर रोज किया करें ये काम,भाग्य को बदलना है तो जरूर देखें

तुम्हारी प्रार्थनाएं परमात्मा तक पहुंच भी नहीं करती है हम दिल से नहीं पुकारते हैं हम हृदय से नहीं पुकारते हैं हम प्राण पान से नहीं पुकारते हैं देखा नहीं हमारी समाज में महिलाएं बगैर भक्तामर पाठ पड़े पानी नहीं पीटी है 48 का जब तक ना पढ़ ले और जिन माता को पढ़ना लिखना नहीं आता वो दूसरों से हटकर पाठ सुनती है फिर भजन ग्रहण करती है लेकिन एक पढ़ रखा है रात रखा है जिंदगी भर भक्तामर पढ़ने हो जहां तक मैं सोचता हूं की मैंने तुम लाचारी ने जिंदगी भर वक्त अमर पाठ नहीं पड़ा होगा ना उन्होंने प्रतिदिन उसका पाठ किया होगा जीवन में एक बार उन्होंने पढ़ा और एक बार पांच पढ़ने हैं भक्तामर का 48 तालों को तोड़ करके जंजीर को तोड़कर बाहर खड़े दिखाई जय की सलाखों को तोड़ दिया करते हैं एक बार पढ़ करके सुनिए और आप जिंदगी भर पढ़ने हो तले तो छोड़ो आज घर जाना दरवाजे बैंड करना कुंडी लगाना इतना तो छोड़ो हिल जाए तो भी समझना की हमने कोई भक्तामर पाठ कोई फर्क नहीं पड़ता है जितना मीठा अनुराधा पौडवाल ने गया कभी नहीं होगा लेकिन अनुराधा पौडवाल अपने कंठ से भक्तांबर ग तो शक्ति है पर कोई तले तोड़ नहीं शक्ति है और यदि सर ना हो तो भी मानूंगा यार एक-एक काव्या पढ़कर के एक-एक तले को तोड़ दिया करते हैं प्राण जुड़े प्राण नहीं जुड़े तो कोई प्रार्थना चमत्कार ना करेगी हमारी प्रार्थनाएं तामसिक प्रार्थनाएं हैं हमारी इबादत में भी दूसरों की भलाई नहीं है एक बुढ़िया थी बड़ी दुखी थी घूमती थी सड़कों पर किसको निकलते है जो लोग मंदिरों का खाता हैं उनकी पेट में कूबड़ निकलते है जो धर्म का पैसा खाता हैं जो लोग निर्माण विभाग अगली जन्म में उनकी पीठ में कुबदा रखती जाति है ध्यान रखिए इसलिए सब कुछ करना क्योंकि मा जाना दाल रोटी का के जिंदगी गुर्जर देना मिले तो घास की रोटी का के जीवन गुजरा धर्म और धर्म का धन-भक्षण नहीं करना चाहिए धर्म स्थलों का वक्षण नहीं करना चाहिए मंदिरों की प्रॉपर्टीजयों पर कब्जे किया बैठे हैं लोग बरसों से दुकान लिए बैठे हैं 20-20 40 रुपया किराया देते हैं आप सोचिए धर्म है आप धर्म का भाषण कर रहे हैं और एक बात ध्यान रखना ईश्वर जब देता है तो छप्पर फाड़ के देता है और ईश्वर जब लेट है तो चंडी लेट है खाना जैन दर्शन में कहा है की सबसे बड़ा कोई पाप है तो निर्मली भाषण सबसे बड़ा पाप हुआ करता है जब तक तेरे पे हजार अध्ययन जब तक पुण्य उदय है खूब का लो पी लो जी दिन पाप का उदय आएगा ध्यान रखना है कूबड़ निकाल आई उसे बुढ़िया मालकिन करो जो दुनिया का मलिक हम उसकी मलिक कैसे रहते हैं तो हम केवल सेवक हैं सेवक मैं बहुत से मंदिरों में जाता हूं नियम लिखे रहते हैं इस मंदिर में यह नहीं होगा इस मंदिर में वो नहीं होगा यहां ये नहीं चढ़ेगा यहां वो नहीं चढ़ेगा आदेश से अध्यक्ष शर्म आई है मुझे अध्यक्ष आदि अध्यक्ष कभी आदेश नहीं करता ध्यान रखें कभी भी मंदिरों के बोर्ड पर आदेश और आजा नहीं लिखी जाति वहां पर तो हाथ जोड़कर निवेदन लिखा जाता है ध्यान रखिए भगवान के दरबार में आदेश कम नहीं करते वहां पर तो हाथ जोड़कर निवेदन कम किया करता है अरे देश की प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति भी इस देश पर आदेश नहीं चलते जब भी दिल्ली दरबार से उतार कर जनता के बीच आते हैं तुम्हें भी हाथ जोड़कर जनता का निवेदन करना पड़ता है जनता के हाथ जोड़ना पढ़ते हैं जनता पर ईश्वर ने तुम्हें सेवा करने का मौका प्रधान किया है एक व्यक्ति को मैंने एक कम के लिए आदेश किया मैंने कहा की मेरे भाई ये कम कर देगा मैंने कहा क्यों कोई कठिन कम है तू नहीं कर पाएगा मेरे लिए कोई कठिन कम नहीं है तो फिर तेरी आंख क्यों भर आई बोले आंख इसलिए भर आई महाराज की आपने मुझे कम की योग्य समझा वरना मेरे जैसी तो आपके पास हजारों आते हैं यदि आपने कम बता दिया तो मुझे लगा की आपकी कृपा मेरे ऊपर बरस गई है कोई कम गुरु बता दे जीवन का सौभाग्य समझना और कम करने के बाद ही मत समझना की हमने उन पर कोई एहसान कर दिया है अरे क्या एहसान करोगे तुम एहसान तो संत ने तुम पर कर दिया है और तुम्हारे लिए कल्याण के रास्ते कचोरी करते हो अपना गुलाम बना लिया हो जा किस्मत वाले हो वरना लाखों लोग आते हैं संत दरबार में पूरा चौमासा करके चला जाऊंगा 90% लोगों के तो मुझे नाम भी मालूम नहीं होंगे ध्यान रखिए नाम जुबान पर होते हैं एक बात याद रखना कहते हैं ना की जिनके नाम संतो की जुबान पर होते हैं ध्यान रखना इससे बड़ा नोबल पुरस्कार दुनिया का कोई दूसरा नहीं हुआ करता हर किसी का नाम पहचान के लिए बहुत कुछ करना पड़ता है ध्यान रखिए मान्यवर 


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