उत्तम क्षमा धर्म | समस्या का अंतिम हाल माफी है, कर दो या मांग लो | जिनशरणम तीर्थधाम, 19 सितम्बर 2023
उत्तम क्षमा धर्म | समस्या का अंतिम हाल माफी है, कर दो या मांग लो | जिनशरणम तीर्थधाम, 19 सितम्बर 2023
कोई पूछे सिविल से जान के बाद क्या किया क्या पाया क्या खाया क्या खोया 10 दिन आकलन करना अपना की हमने कुछ पाया है की नहीं पाया है कुछ खोया है की नहीं खोया है ध्यान रखना क्या शिखा 10 दिन की साधना में एक ही चीज याद रखना 10 दिन की साधना में इतना ही सिख कर के जाना जब लेने का मौका आए ना जब बोले की बोलो तुम्हें क्या चाहिए तो लेने का मौका है तो लेने के नाम पर भगवान का नाम लेना और देने के नाम पर है तो लोगों को दुआएं देना यही जीवन की सन लेने के नाम पे प्रभु का नाम और देने के नाम पर दुआएं 10 दिन शारीरिक साधना तो कर ली है घर परिवार तो छोड़ दिया मां का क्या ख्याल है ऐसा तो नहीं मुख मैं तो माला प्रेम बाजार ध्यान रखना मां घर में जा रहा है मां व्यापार में जा रहा है मां बाजार में जा रहा है जो युटुब से देख रहे वो का रहा है धन्य है ये लोग जो यहां साधना कर रहे ध्यान रखना और तुम यदि सोच रहे की यार एक दिन तो कट गया नो और बच्चे हैं मैं अभी तो शुरुआत है तो ध्यान रखना तुम यहां बैठकर भी घर में बैठे हो और घर के लोग घर में होकर भी शिविर में बैठे हुए करिए सब कुछ प्रभु के पास है पाया अपने भाग ओ साड़ी चिंता छोड़कर प्रभु चरण में लाख सब चिंताएं छोड़ो चिंतामणि पारसनाथ का यह तीर्थ फिर चिंता किस बात की है कोई चिंता करने की जरूर नहीं है व्यापार की नहीं दुकान की नहीं परिवार की नहीं रिश्तो की नहीं ना तो की नहीं क्या रखा है अनुशासन जीवन अनुशासन विहीन है हमारा जब मानता है का लेते हैं जब मां आता है पी लेते हैं जब मानता है शोले हैं जब मानता है जग लेते हैं जब मां आता है घूमने फर्न चले जाते अनुशासन भी कोई जीवन शैली है हमारी जीवन की कब उठाना कब सोना कब जगन 10 दिन अनुशासन सीखना है समय पर भजन समय पर विश्वास समय पर धर्म ध्यान समय पर वार्तालाप समय पर भगवान ध्यान रखना कुछ भी जेउबान समर्पित कर दो ऐसा ना हो की तन तो 10 दिन यहां लगा दिया मां लगे नहीं तो क्या मतलब रहा कोई फल मिलने वाला नहीं है पुरी आत्मा के साथ यहां ली हो जैन अनुशासन खुद का होना चाहिए अनुशासन स्वयं का होना चाहिए अपने मां से प्रेरित होकर के यहां आए हो तो अनुशासन नहीं स्वयं का होना ऐसा नहीं है की दूर से आए और जितने कहा था सब व्यवस्था मिलेगी यहां तो व्यवस्था ही नहीं है यहां तो कपड़े डालने की व्यवस्था नहीं है यहां तो साबुन की व्यवस्था नहीं है यहां तो सोनी धरती की बनिया गिरी घर में भी और यहां पर भी यही चल रहा था मतलब क्या रहा यहां आने का ध्यान रखना कुछ नहीं जमीन मिले धरती बढ़ा लेना काश ओड लेना और जिंदगी को आराम से व्यतीत 10 दिन तो सब छोड़ कर देखो केवल 10 दिन की साधना करो ये 10 दिन ही तुम्हारी जिंदगी के बड़े महत्वपूर्ण दिया हो दिन होते हैं क्योंकि कर श्वेतांबर समाज कभी पर्यूषण समाप्त हुए आठ दिन के दिगंबर समाज के कितने दिन के होते 10 दिन के मैंने कहा आठ के कुआं अपने 10 के क्यों बोले अपने दो दिन ज्यादा होते हैं क्यों होते हैं क्योंकि कहां है एक के बाद दो दो के बाद तीन तीन के बाद कर के बाद पांच पांच के बाद छह छह के बाद साथ-साथ के बाद आठ आठ के बाद नो नो के बाद 10 -10 के बाद बस के बाद क्या बस अब कुछ नहीं इसके बाद तो जीवन का कल्याण हो जाए 10 दिन की यह पवित्र साधना से कहूंगा मां को पवित्र करें दिल बड़ा करें खाने में थोड़ा सा लेट हो गए दिल बना करो कोई बात नहीं का लेंगे क्या है व्यवस्था में थोड़ी सी दिक्कत हो गई कोई बात नहीं सब चला है जीवन ऐसा देने मिला नहीं मिला कोई बात नहीं कसाई करने की जरूर नहीं है परिणाम बिगड़ना की जरूर नहीं है आशीर्वाद महाराज का मिल गया नहीं उठा हाथ नहीं देखा कोई बात नहीं है क्या करना है हम अपना पुण्य कमाने के लिए आए हैं ध्यान रखना अपना अपनी भावनाओं से मिला करता है अपनी साधना से मिलता है हमारा नाम नहीं आया मंच पर कोई बात नहीं हम अपना नाम लेने आए हैं की भगवान का नाम लेने के लिए आए हैं घर छोड़कर प्रभु का नाम लेना है परमात्मा का नाम लेना जो कुछ जो है सीमित जीवन दिखाए ना धर्म के लिए सीमित जीवन जी ऐसा अनुशासन रखो ऐसा अनुशासन बना जो स्वत प्रेरित होना चाहिए ऐसा नहीं की जब हम स्कूल जाते थे ना तो जब तक टीचर नहीं आई थी क्लास में क्लास का क्या नजर राहत है पढ़े होंगे तोड़े बहुत गए होंगे धमाल मची रहती है तूफान मचा राहत है खींचतान बातचीत मची रहती है लड़ाई झगड़ा बच्चे कर जैसे ही टीचर आया सब बिल्कुल साइलेंट अपनी अपनी जगह है टीचर का डर के मारे नहीं कर रहे नहीं स्वत है प्रेरित हो मालूम है मैं अपने गुरु जी के पास था 27 साल हो गए मुझे घर परिवार को व्यक्त हुए गुरु चरणों में अपना जीवन अर्पित किया इटावा में चातुर्मास का मैं ब्रह्मचारी था मुझे यह सौभाग्य मिला की मैं अपना रात्रि विश्राम अपने गुरु के साथ किया करता था इस कक्षा में करता था वो सो रहे हैं हमारी भी चटाई लगी है उनकी भी लगी हुई है सुबह-सुबह का वक्त हम लोग नए-नए ब्रह्मचारी बने महाराज क्या करते थे मालूम है जब सुबह उठाते थे ना इतनी दबे दबे हाथों से चटाई उठाते थे खुद की मालूम है क्यों इसलिए की इनकी नींद ना खुला जाए वो होते हैं सद्गुरु इसकी नींद ना खुद धीरे से चटाई उठाते थे तीन बजे रात को उठ जा शाम माइक में बैठ जाते हम लोग भी बड़े अलर्ट रहा करते थे की गुरुदेव तो हमें उठाएंगे नहीं उठाना तो अपने कोई है उनका प्रयास राहत था की यह इसकी नींद डिस्टर्ब ना हो बच्चे हैं अभी अभी घर छोड़ है सिख जाएंगे कोई बात नहीं है उनका प्रयास था की इनकी नींद ना खुला और हमारा प्रयास था की गुरु उठे उससे पहले हमको अपना आसन छोड़ देना है हमको उठ करके बैठ जाना है हमें अपना जीवन सार्थक बना प्रेरित अनुशासन आत्म प्रेरित अनुशासन वो नहीं कहते थे गुरु ने हमें आज सब कुछ दिया उन्होंने निजात में जीने का अवसर प्रधान किया तुम अपना जीवन जियो अपने आनंद के साथ जियो किसी को बड़े बड़े ऐसा रखना चाहिए आपको देखकर के की सही में ये शादी का साधना कर रही है इस सड़क साधना कर रहा है अधिक से अधिक मौन रहो पुरी जिंदगी तो बोले किसी बात कम क्या है शांत चित आपसे सौम्यता झलकना चाहिए आपको लगे की मैंने 10 दिन आकर कुछ अर्जित किया है उत्तम क्षमा क्या होती है अधिकतम क्षमा धर्म है हजारों वर्ष का अंधकार हो हजारों डंडे मारो अंधेरे को की तू भाग जा हमें छोड़ कर के लाठी मारते रहो अंधेरे में अंधेरा कितनी डर में भागेगा बोलिए एक कमरे में अंधेरा है और एक डंडा हाथ में ले लो है अंधेरा निकाल इस घर से बाहर है अंधकार निकाल इस घर से बाहर रात भर लाठी चलाओ अंधेरा भागेगा नहीं भेज गाना ध्यान रखना हाथ दुख जाएंगे लाठी टूट जाएगी लेकिन अंधेरा भागने वाला नहीं क्रोध ना हो क्रोध ना हो क्रोध ना हो क्रोध भाग जा क्रोध भाग जा जिंदगी भर चिल्लाते रहोगे क्रोध तुम्हें छोड़कर जान वाला नहीं है तक जाओगे जितना जितना क्रोध को रुकोगे उतना उतना क्रोध उभर के आएगा बड़ी पावर के साथ भर के आएगा ध्यान रखना क्रोध को गलियां देने से क्रोध नहीं भगत है क्रोध को बड़ा खाने से क्रोध नहीं भगत है क्रोध को डंडे करने से क्रोध नहीं भाग करता है क्या करना है बोले कुछ नहीं करना है तो क्या करो एक दिया जल दो दिया जल जाए की बरसों पुराना अंधकार हमें छोड़कर के अपने आप भाग जाता है ध्यान रखना क्षमा का दिया समझदारी का दिया यदि भीतर जल या ना तो क्रोध का अंधेरा हमें छोड़कर के अपने आप भाग जाएगा कभी ये देखा है तुमने सब्जियां आई है ना तुम्हारे घरों में आओ तुम्हारे घर में चलते हैं सब्जियां आई हैं टमाटर आता है मालूम है टमाटर उसको फ्रिज में रख दो तो एक दिन और चल जाता है लेकिन एक बात याद रखना यदि वो टमाटर कितना भी फ्रिज में रख दो एक दिन में सड़ना था वो दो दिन में सड़ेगा सड़ने वाला तो है ही फिर क्या करती है होशियार नई होशियार माताएं क्या करती हैं की यह सादे उससे पहले उसको सब्जी बनाकर किसी की चूड़ा मित देती है किसी का बुक मित देती यह सारे उससे पहले सब्जी बना कर पेट भर लो तृप्ति हो जो वरना उसका तो सड़ना निश्चित है मैं भी आपसे का रहा हूं इस शरीर भी हमारा एक टमाटर है ध्यान रखना तो निश्चित है चाय क्रीम लगा लो पाउडर लगा लो साबुन लगा लो धुला लो ये तो साधेगा सड़ेगा या नहीं सड़ेगा तो होशियार माता बहनों की तरह उससे पहले टमाटर इसकी सब्जी मत बना देना नहीं तो तुम बड़े होशियार हो की टमाटर के साथ चलो इस आदमी की सब्जी बना दो नहीं आदमी की अपने जीवन को टमाटर को सड़ने से पहले सब्जी बना लो तो उसका सार्थक हो जाता है भजन ध्यान रखना और ये शरीर भी एक दिन साधेगा सड़ने से पहले प्रभु की भक्ति और साधना में लगा दो तुम्हारा शरीर पन सार्थक नष्ट तो फिर रहेगा ये तृप्ति होता है क्या जिंदगी में तृप्ति नहीं होता अंगमगलितम मुंडम दशम भी ना मजा तुम ना दो या टिकेतवा डंडा में क्या कहा अंगम गनी दांत गिर गए मां जवान राहत है जो मिल जाए अच्छी बात है
तुम्हारा बाउंड्री के बाहर जाओगे कहां कुछ नहीं है इधर देखो तो जंगल इधर देखो तो जंगल उधर देखो तो जंगल इन चारों तरफ के जंगलों के बीच में एक ही है मंगल ध्यान रखना यहां पर मंगल कर रहे हैं कहां जाओगे बाउंड्री के बाहर घूमने भी जाना तो कहां जाओगे कुछ नहीं है 20-20 किलोमीटर पर आदमी दिखाई नहीं देता है 20-20 किलोमीटर पर 10 10 किलोमीटर पर कुछ लेना है तो कुछ भी मिलने वाला नहीं अपने आप संसार से विरक्त हो गया हमारा जीवन आनंद के साथ क्रोध को मित समझदारी को जागृत करना है क्षमा को जागृत करना ध्यान नहीं देना है [हंसी] कुछ लोग बड़ी-बड़ी बटन को भी हल्के मूड में निकाल दिया करते हैं जहां भी समय मिले अकेले एकांत का आंख बैंड करके बैठ जाना आई जाति सांस को लेना देखना चुपचाप बैठे हैं कुछ मत करो ना पढ़ना ना लिखना नमन प्रणाम बोलना ही नहीं किसी से क्या बोलना पूरा जीवन बोलते बोलते बीट गया पूरा जीवन हमारा संसार में बीट गया पूरा जीवन हमारा इंद्रियों में बीट गया
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