जिनका कोई नहीं, उनका बनें सहारा

तुम लोगों में से कितनों ने कभी यह सोचा कि अपने नगर या कस्बे के अस्पताल में एक घंटे जाकर मरीजों की सेवा कर लें। जिन मरीजों का कोई नहीं है उनका सहारा बन जाएं। सिर्फ किसी त्यौहार या अपने जन्मदिन पर अस्पताल जाकर मरीजों को फल बांट आने और उसका फोटो अखबार में छपवाने मात्रा से काम नहीं चलेगा बल्कि अंतर्मन से और नर को ही नारायण मानने के भाव को समाहित करने के सच्चे भाव से की गई सेवा से ही आपको आनंद मिलेगा और दूसरों के कष्ट दूर होंगे। सेवा का क्षेत्रा अनंत है। कोई सा भी एक क्षेत्रा चुन लो और जुट जाओ उसी प्रकल्प में। फिर देखना तुम्हें अपने जीवन में किस कदर सकारात्मक अनुभूतियां होती हैं। वंचित, रुग्बा और पीड़ित मानवता की सेवा में तुम्हें जैसा आनंद आएगा, उसकी चंद शब्दों में व्याख्या नहीं की जा सकती। एक बार सेवा प्रकल्प में जुटकर तो देखो, तुम इतने मगन हो जाओगे कि सेवा अभियान से अलग होने का कभी स्वप्न में भी विचार नहीं आएगा। मैं तुम्हें मंदिर जाकर ईशपूजा करने से नहीं रोक रहा, खूब मंदिर जाओ, धर्मपुस्तकों में बताए सभी अनुष्ठान एवं धार्मिक संस्कार करो लेकिन पीड़ित मानवता की सेवा से जी न चुराओ।


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