इन लोगों की कर सकते हो मदद

 



तुम पूछ सकते हो कि सेवा किसकी की जाए? तुम अपने घर या मंदिर से बाहर निकलकर चारों ओर नजर दौड़ाओगे तो इस प्रश्न का उत्तर तुम्हें खुद ही मिल जाएगा। कई युवा पढ़े-लिखे होने के बावजूद बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं, हम उन्हें भले ही सरकारी या प्राइवेट नौकरी नहीं दिला सकते लेकिन अपने संपर्कों का लाभ लेकर स्वरोजगार खुलवाकर उनका कैरियर संवार सकते हैं। समाज में कई विधवा, परित्यक्ता और निराश्रित महिलाओं को दो जून की रोटी तक के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। क्या हम कोई ऐसा इंतजाम नहीं कर सकते कि उनकी गुजर-बसर निर्विध्न ढंग से हो सके, उनके लिए सिलाई-कढ़ाई या कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र जैसे खुलवाकर हम उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में सहयोगी बन सकते हैं। पढ़ाई-लिखाई में मेधावी होने के बावजूद कई होनहार बच्चों को हर साल सिर्फ इस कारण स्कूल छोड़ना पड़ता है क्योंकि उनके परिवार के पास फीस भरने या कॉपी किताब खरीदने के लिए पैसे नहीं होते, क्या हम अपने जेब-खर्च में कुछ कटौती कर या अन्य फालतू के व्ययों को कम कर उनकी पढ़ाई को जारी रखने में सहयोगी नहीं बन सकते!

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